दिल्ली में चाँग्वोन के-पॉप विश्व महोत्सव 2018 के ग्रैंड फिनले का आयोजन

विवेक शर्मा: नई दिल्लीजुलाई 2018: कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र (भारत) ने सिरी फोर्ट ऑडिटोरियमनई दिल्ली में चाँग्वोन के-पॉप विश्व महोत्सव (भारत) 2018 के ग्रैंड फिनले का आयोजन किया। के-पॉप (भारत) प्रतियोगिता के विजेता, 5 अक्टूबर 2018 को के-पॉप वर्ल्ड फेस्टिवल फाइनलसियोल प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगें। इस साल के-पॉप प्रतियोगिता (भारत), पहले से अधिक रोमांचक हुई क्योंकि दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला, ‘किम जंग सुक’ ग्रैंड फिनाले में सहभागी हुईं। इस प्रतियोगिता का आकलन कोरियाई बॉय बैंड स्नूपर द्वारा किया गया। उन्होंने भी ग्रैंड फाइनल में प्रदर्शन किया। चाँग्वोन के-पॉप विश्व महोत्सव (भारत) 2018 का अंतिम चरण, कोरियाई पॉप के लिए भारतीय युवाओं की प्रतिभा और जुनून से भरा हुआ था। 22 टोलियों और एकल कलाकारों के बीच एक रोमांचक नृत्य और कंठ संगीत प्रतिस्पर्धा में मिजोरम की ‘जुची’ ने कंठ संगीत के लिए पहला पुरस्कार जीताजबकि दिल्ली से वी आर फ़ैमिली क्रू‘ ने नृत्य श्रेणी में शीर्ष पुरस्कार प्राप्त किया। कंठ संगीत में प्रथम उपविजेता चेन्नई से श्रुति रामनारायण रहीं और नृत्य श्रेणी में यह पुरस्कार मुंबई से एलिक्सीर क्रू‘ को गया। बेंगलुरु से जेमीमा राफेल और मिजोरम से हार्मोनिक बॉयज़‘ ने क्रमशः कंठ संगीत और नृत्य श्रेणियों में तीसरा पुरस्कार जीता। विजेता अब के-पॉप वर्ल्ड फेस्टिवल फाइनल के लिए अक्तूबर 2018 को दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। भारतीय कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक ‘किम कुम-प्योंग’ ने कहा कि भारत में के-पॉप प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा की, के-पॉप के प्रति बढ़ते प्यार को देखते हुए वे ‘बीटीएस’ और ‘एक्सो’ समूह को भारत लाने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने ‘स्नूपर’ समूह को उनके अद्भुत प्रदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया। ग्रैंड फिनाले का प्रारंभ ‘स्टैक्टाटो’ समूहदिल्ली के प्रदर्शन से हुआ। ‘स्टैक्टाटो’ समूह गत वर्ष कंठ संगीत के विजेता थेजिन्होंने दर्शकों को अपने प्रदर्शन से मंत्रमुग्ध किया था। इस वर्ष पूरे भारत से 532 टोलियों के रूप में 1,200 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने प्रदर्शन की वीडियो पंजीकृत की थीं। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य, डॉ राकेश कुमार ने कहा कि भारत के लिए अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रचार-प्रसार हेतु यह एक अच्छा उदाहरण है तथा इस प्रकार के कार्यक्रम भारत द्वारा दुनिया भर में किये जाने की महती आवश्यकता है।

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