घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005

       आवेदन पत्र मिलने पर यदि मजिस्टेट को लगता है कि महिला घरेलू हिंसा की शिकार है तो प्रतिवादी के विरूद्ध निम्नलिखित आदेश पारित कर सकता है –

 1 –  निवास सम्बन्धी आदेश :-

* जिस घर मे महिला निवास कर रही है प्रतिवादी उसे वहाँ से नही निकाल सकता है ।
* प्रतिवादी ओर उसके किसी रिश्तेदार को महिला के निवास स्थान मे न घूसने का आदेश भी दे सकता है ।
* प्रतिवादी को उस घर को बेचने या किसी को देने से भी रोका जा सकता है ।
* प्रतिवादी को पीडित महिला के लिए अलग से घर की व्यवस्था करने , उसका किराया देने आदि का भी आदेश दिया जा सकता है ।
* पीडित व उसके बच्चे की सुरक्षा के लिए मजिस्ट्रेट जो उचित समझे प्रतिवादी को आदेश दे सकता है।
* मजिस्ट्रेट प्रतिवादी को पीडित महिला का स्त्रीधन अन्य सम्पत्ति वापस करने का भी आदेश दे सकता है ।

२ -अभिरक्षा सम्बंधी आदेश :-

मजिस्ट्रेट संरक्षण या अन्य राहत के लिए दिए गए आवेदन की सुनवाई के समय पीडित व्यक्ति को अपने वच्चों को अस्थाई रूप से अपने पास रखने का भी आदेश दे सकता है ।

3 -आर्थिक राहत :-

* मजिस्ट्रेट ऐसे मामलो मे आर्थिक राहत के भी आदेश दे सकता है ,जैसे :-
1- आय को नुकसान ।
2- चिकित्सीय खर्च ।
3- किसी सम्पत्ति जिस पर व्यथित व्यक्ति का नियंत्रण हो , उसका नुकसान बर्बादी या उस सम्पत्ति से उसे निकाल देने का हर्जाना ।
4- भरण पोषण के आदेश ।

4 – मुआवजे से सम्बधित आदेश :-

     मजिस्ट्रेट इस अधिनियम मे दी गयी राहत के अलावा प्रतिवादी को पीडित व्यक्ति को हुई मानसिक , भावानात्मक पीडा के लिए भी मुआवजे का आदेश दे सकता है ।

5 -सलाह और विशेषज्ञ की मदद :-

    मजिस्ट्रेट एक पक्ष के लिए या दोनो पक्षो के लिए किसी विशेषज्ञ की भी मदद ली जा सकती है ।
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