स्कूल ठीक करो… लेकिन हिसाब भी बताओ!

🏫 “स्कूल ठीक करने का अभियान अच्छी पहल है… लेकिन सवाल यह है कि एक स्कूल को ठीक करने में कितने रुपये खर्च हो रहे हैं?”

देश में सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने को लेकर “स्कूल ठीक करो” अभियान की आवाज तेज हो रही है। कई जगह स्कूलों में मरम्मत, रंग-रोगन, शौचालय, बिजली, पानी, फर्नीचर और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर काम भी किया जा रहा है।

बच्चों के लिए बेहतर स्कूल बनना निश्चित तौर पर अच्छी खबर है।
लेकिन इसी के साथ एक सवाल उठाना भी जरूरी है—

💰 एक स्कूल को ठीक करने में कितना पैसा खर्च हुआ? सब ऑनलाइन बताओ !

क्या हर स्कूल के लिए तय बजट सार्वजनिक किया जा रहा है?

किस काम के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई?

किस ठेकेदार या एजेंसी को काम दिया गया?

काम पूरा होने के बाद उसका माप और गुणवत्ता परीक्षण किसने किया?

और सबसे बड़ा सवाल—

🚨 कहीं स्कूल सुधारने के नाम पर सरकारी पैसे की बंदरबांट का नया रास्ता तो नहीं बन जाएगा?

क्योंकि भ्रष्टाचार सिर्फ बड़े घोटालों से नहीं होता।
कभी-कभी छोटे-छोटे निर्माण कार्यों में बढ़े हुए बिल, घटिया सामग्री और कागजों पर पूरा दिखाया गया काम भी सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसलिए “स्कूल ठीक करो” अभियान के साथ एक और अभियान जरूरी है—

🔍 “स्कूल का हिसाब दो!”

हर स्कूल के बाहर या ऑनलाइन सार्वजनिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए:

📌 स्वीकृत बजट — ₹ कितना?
📌 खर्च की गई राशि — ₹ कितना?
📌 काम की सूची — क्या-क्या हुआ?
📌 ठेकेदार/एजेंसी — कौन?
📌 काम पूरा होने की तारीख — कब?
📌 गुणवत्ता जांच — किसने की?
📌 भुगतान — कितना और कब?

🔥 स्कूल सुंदर दिखना जरूरी है… लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है कि स्कूल सुधारने में लगा हर सरकारी रुपया भी साफ दिखाई दे।

क्योंकि बच्चों के स्कूल का पैसा बच्चों के भविष्य पर लगना चाहिए, किसी की जेब पर नहीं।

News One Nation का सवाल:
👉 “स्कूल ठीक करो… लेकिन खर्च का पूरा हिसाब भी दो। आखिर जनता के पैसे का हिसाब जनता को क्यों न मिले?”