CJP के “स्कूल ठीक करो” अभियान का असर अब सरकारी स्कूलों के छात्रों के बीच भी दिखाई देने लगा है।
जो बच्चे रोज़ स्कूल की समस्याओं को देखते थे,
अब वही बच्चे उन समस्याओं पर बोलने और सवाल पूछने के लिए सक्रिय हो रहे हैं।
सवाल सिर्फ़ टूटी दीवार, शौचालय, पानी या दूसरी सुविधाओं का नहीं…
सवाल है—
क्या सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए, जो एक अच्छे स्कूल की पहचान हैं?
“स्कूल ठीक करो” अभियान अब सिर्फ़ स्कूल की इमारत सुधारने की बात नहीं कर रहा,
बल्कि बच्चों को अपनी शिक्षा और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का मंच भी दे रहा है।
क्योंकि जब बच्चे सवाल पूछना शुरू कर दें…
तो शायद बदलाव की शुरुआत वहीं से होती है।




